सर्वाइकल कैंसर क्या है-What is cervical-in hindi

दुनिया में कई नए बीमारी का फेलाव हो रहा हे इसमें सेहि ऐक है सवाईकल कैंसर तो आज हम इसके बारेमे बात करेगे,

कैंसर एक ऐसी बीमारी हे जिसका नाम सुनते ही लोगों के होश उड़ जाते हे. इससे पीड़ित इंसान हर पल मौत के डर के साये में जीता हे. क्या पता कब मौत आ जाये और उसे अपने आगोश में ले ले. वैसे तो कैंसर के कई प्रकार हे लेकिन इन दिनों महिलाओं में जो कैंसर काफी तेजी से फ़ैल रहा हे, वह हे ‘सवाईकल कैंसर’. इस बीमारी से महिलाएं पूरी तरह से परिचित नहीं हे. अब महिलाएं इसके प्रति जागरूक हुई हे और इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहती हे.

सर्वाइकल कैंसर क्या है


सवाईकल कैंसर गर्भाशय की बीमारी हे. महिलाओं की बच्चेदानी के मुहं पर जो कैंसर होता हे उसे सवाईकल कैंसर कहते हे. हमारे देश में महिलाओं, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं में यह कैंसर काफी तेजी से फ़ैल रहा हे. सर्वाइकल कैंसर होने के कारण तो इसका कारण उनमे जानकारी की कमी हे. वहां कम उम्र में ही लड़कियों की शादी कर दी जाती हे, जिससे इन्फेक्शन का खतरा काफी बढ़ जाता हे. कच्ची उम्र में बच्चेदानी भी कमजोर होने की वजह से हमेशा संबध बनाने, बच्चे को जन्म देने तथा गर्भपात आदिकी स्थिति में इस तरह के इन्फेक्शन होते हे.

इसके अलावा कुछ लोग बहुत ही वहशी तरीके से संबध बनाते हे जिससे गर्भाशय को नुकसान होता हे. सवाईकल कैंसर ह्युमन पैपीलोमा वायरस (HPV) की वजह से होता हे. सवाईकल कैंसर दो तरह के होते हे. पहला ‘सिक्युम्स सेल कैरीसीनोमा’ और दूसरा ‘एडिनोकैरीसीनोमा’. सवाईकल एरिया में होने के कारण इसे सवाईकल कैंसर कहा जाता हे. बाद में यह पुरे शरीर में फ़ैल जाता हे. सवाईकल कैंसर कुछ खास कारणों से होता हे, जिनमे HPV इन्फेक्शन, स्मोकिंग, बार-बार होने वाली प्रेगनेंसी, एक से ज्यादा सेक्सुअल पार्टनर, कम उम्र में यौन संबध, असुरक्षित यौन संबध से फैलने वाले वायरस और परिवार में किसी को पूर्व में सवाईकल कैंसर का होना हे.



सवाईकल कैंसर के शुरूआती लक्षण


वजाइनल ब्लीडिंग, पीरियड के बीच में स्पाटिंग, मीनोपोज के बाद ब्लीडिंग, कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द, सेक्सुअल रिलेशन स्थापित करते समय दर्द और ब्लीडिंग होना, वजाइना से हमेशा ब्लड डिस्चार्ज होते रहना आदि सवाईकल कैंसर के शुरूआती लक्षण हे.
टेस्ट और बचाव

सर्वाइकल का उपचार

शुरूआती अवस्था में अगर सवाईकल कैंसर का पता चल जाये तो इसका इलाज हो सकता हे, लेकिन देर से पता चलने पर इससे पार पाना मुश्किल होता हे. बेहतर हे की महिलाएं हर तीन साल में एक बार ‘पैप स्मियर टेस्ट’ करवाती रहे. इस टेस्ट में बच्चेदानी के कैंसर की पहचान और संभावना जांचने के लिए गर्भाशय में चपटा स्पैचुला डालकर सेल्स खुरचकर निकाले जाते हे और उनकी जांच होती हे. यह जांच काफी सस्ती हे. खासकर जिसके एक से ज्यादा सेक्सुअल पार्टनर हो या पारिवारिक इतिहास में यह रोग हो, उन्हें यह टेस्ट जरुर करवाना चाहिए. साथ ही जब कोई महिला सेक्सुअली एक्टिव हो तो उसे भी यह टेस्ट करा लेना चाहिए. इसके अलावा तंबाकू और स्मोकिंग से बचें. हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें और नियमित रूप से व्यायाम करें.

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